संस्कृत गीत (गीत मंजरी)

सुभाषित

यथा हि एकेन चक्रेण न रथस्य गतिर्भवेत्।
एवं पुरूषकारेण विना दैवं न सिध्यति॥

Just like a chariot cannot run with only a single wheel, similarly luck alone cannot complete a task without efforts.

जिस प्रकार एक पहिये वाले रथ की गति संभव नहीं है, उसी प्रकार पुरुषार्थ के बिना केवल भाग्य से कार्य सिद्ध नहीं होते हैं। 

संस्कृत गीत (गीत मंजरी)

यहां पर संस्कृत गीत दियें जा रहे हैं जो " गीत मंजरी " से प्रेरीत है । यहा अन्त मे एक चित्र में सभी गीत और  pdf स्वरुप प्राप्त होगी । धन्यवाद।। 
●वंदे मातरम●

★ बाल गीतानि ★














★संस्कृत गीतानि★






































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