संस्कृत पुस्तकें ,

★सुभाषित★

विद्या नाम नरस्य रूपं अधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनं
विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः ।
विद्या बंधुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता
विद्या राजसु पूजिता न तु धनं विद्याविहीनः पशुः ।।

Knowledge is certainly a man's greatest asset. A man full of knowledge has a beautiful mind. Knowledge is the safest treasure and provides prosperity, fame and happiness. Knowledge is the guru of all gurus. It acts as one's friend in a foreign country. Knowledge is the Supreme God. It is the knowledge, not wealth, which is adorned by kings. Without knowledge & wisdom one remains not very distinct from an animal.

विद्या क्या कर सकती है
विद्या तो आदमी का सबसे बडा, सबसे सलामत और अदृश्य आभूषण है। विद्यावान बहुत समझदार होते है। विद्या ही तो समृद्धि , कीर्ति और सुखचैन देती है । परदेश में एक मित्र का काम करती है। विद्या एक बहुत ही प्रभावशाली शक्ति है । राजा-महाराजा भी धन से अधिक विद्या से अपना प्रभाव बढाते है। विद्याहीन मनुष्य जानवर बन जाता है।


★संस्कृत पुस्तकें ★


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